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بھوکی تری مٹی ہے تو پیاسا ترا پانی اے دنیائے فانی

غزل
علی ارمان

بچپن سے تھی دل کو طلبِ رُکنِ یمانی اے دنیائے فانی
اک دُھن تھی سومیں نے تری مٹی نہیں چھانی اے دنیائے فانی

تو مجھ کو سمجھ آئی ہے مولاؑ کی زبانی اے دنیائے فانی
اک چھینک ہے بکری کی تو اے ننگِ معانی اے دنیائے فانی

گریہ کروں تیرے لیے؟ اتنی تری اوقات! خاموش سُبک ذات!
دل کے لیے مختص ہے مری مرثیہ خوانی اے دنیائے فانی

تو کیسے دکھا سکتی ہے مجھ کو کوئی سپنا؟ جا کام کراپنا
بھوکی تری مٹی ہے تو پیاسا ترا پانی اے دنیائے فانی

آں زُلف کہ دل ابستہ شدم، چیزِ دگراست، پیچیدہ وسربست
هر بندِ ترا بندشِ بی ‌روحِ معانی، ای دنیای فانی

میں اپنے ستارے پہ کھڑا دیکھ رہا ہوں سو بڑا دیکھ رہا ہوں
جامد نظر آتی ہے مجھے تیری روانی اے دنیائے فانی

اندراج نہیں قلب کے قاموس میں تیرا، سو ارشاد ہے میرا
وُہ لفظ ہے تو جس کا نہیں ہے کوئی معنی اے دنیائے فانی

مکتب کی جماعت ہو کہ میخانے کی محفِل،غارت گرِایں دل
ہے تیرے ہراک لطف کا انجام گرانی اے دنیائے فانی

اے دنیائے فانی تجھے پہچان گیا ہوں میں جان گیا ہوں
میں مان گیا ہوں تجھے اے دنیائے فانی اے دنیائے فانی

ارمانؔ مرا نام ہے دھوکے میں نہ رہنا اے زشتِ برہنہ
میں کھول کے رکھ دوں گا تری ہیچ مدانی اے دنیائے فانی

ग़ज़ल
अली अर्मान

बचपन से थी दिल को तलब-ए-रुक्न-ए-यमानी ऐ दुनियाए फ़ानी
इक धुन थी सो मैंने तेरी मट्टी नहीं छानी ऐ दुनियाए फ़ानी

तू मुझको समझ आई है मौला की ज़बानी ऐ दुनियाए फ़ानी
इक छींक़ है बकरी की तू ऐ नंग-ए-मआनी ऐ दुनियाए फ़ानी

गिरया करूँ तेरे लिए? इतनी तेरी औक़ात! ख़ामोश सुबुक ज़ात!
दिल के लिए मुख़्तस है मेरी मर्सिया ख़्वानी ऐ दुनियाए फ़ानी

तू कैसे दिखा सकती है मुझको कोई सपना? जा काम कर अपना
भूकी तेरी मट्टी है, तू प्यासा तेरा पानी ऐ दुनियाए फ़ानी

आँ ज़ुल्फ़ कि दिल बस्ता शुदम, चीज़े दिगर अस्त, पेचीदा व सरबस्त
हर बंद-ए-तु्रा बंदिश-ए बे-रूह-ए मआनी, ऐ दुनियाए फ़ानी

मैं अपने सितारे पे खड़ा देख रहा हूँ, सो बड़ा देख रहा हूँ
जामिद नज़र आती है मुझे तेरी रवानी ऐ दुनियाए फ़ानी

इंद्राज नहीं क़ल्ब के क़ामूस में तेरा, सो इरशाद है मेरा
वो लफ़्ज़ है तू जिसका नहीं है कोई मआनी ऐ दुनियाए फ़ानी

मकतब की जमात हो कि मैख़ाने की महफ़िल, ग़ारत-गर-ए-ईन दिल
है तेरे हर एक लुत्फ़ का अंजाम गरानी ऐ दुनियाए फ़ानी

ऐ दुनियाए फ़ानी तुझे पहचान गया हूँ, मैं जान गया हूँ
मैं मान गया हूँ तुझे ऐ दुनियाए फ़ानी, ऐ दुनियाए फ़ानी

अरमान मेरा नाम है धोके में न रहना, ऐ ज़िश्त-ए-बरहना
मैं खोल के रख दूँगा तेरी हीच मदानी ऐ दुनियाए फ़ानी

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